Sanghiji Jain Mandir - Shri Digamber Jain Atishaya Kshetra Sanganer Jaipur
Sanghiji Mandir
अहिंसा ही सबसे महान धर्म है।
Sanghiji Jain Mandir
शांति और आत्म-नियंत्रण अहिंसा है।
Sanganer Mandir
जो स्वयं पर विजय प्राप्त कर ले,

उन्हें ही असली आनंद की प्राप्ति होती हैं |

About The Mandir

Sanghiji Adinath

Adinath Bhagwan Sanghiji Mandir (Rishabh Dev)

Lord Rishabhdev also known as Lord Adinath was the first Jain Tirthankar of present time cycle. He lived before civilization developed. He became a Siddha, a liberated soul which has destroyed all of its karma..



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Namokar Mantra

Namaskar / Namokar Mantra

Namokara mantra is the most significant mantra in Jainism. This is the first prayer recited by the Jains while meditating. The mantra is also variously referred to as the Pancha Namaskāra Mantra, Navakāra Mantra or Namaskāra Mantra.



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Sanghiji Mandir

How To Reach Sanghiji / संघी जी कैसे पहुंचे

जयपुर बस स्टैंड से दूरी कुल 13 किलोमीटर

सिंधी कैम्प बस स्टैंड से दूरी कुल 15 किलोमीटर

जयपुर रेलवे स्टेशन से दूरी 13 किलोमीटर

करीबी रेलवे स्टेशन दुर्गापुरा रेलवे स्टेशन दूरी 5 किलोमीटर


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Take Me To Sanghiji Jain Mandir

राजस्थान के प्राचीन नगरों में सांगानेर का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है । सांगानेर की बसावट समतल भूमि पर है । जिसके तट पर सरस्वती नदी बहती थी ।

सांगानेर राजस्थान की राजधानी जयपुर शहर से 13 किलोमीटर दूर दक्षिण की ओर स्थित है । प्राचीन ग्रंथों में इसका नाम संग्रामपुर भी मिलता है । यह नाम चतुर्थकालीन राजाओं से जुड़ा हुआ है । सांगानेर के पास चम्पावती , चाकसू , तथकगढ एवं आम्रगढ़ के राज्य थे , जिन्हें सांगानेर की समृद्धि , वैभव एवं उन्नति होने से ईर्ष्या थी । इन राजाओं ने मिलकर स्वर्गपुरी की उपमा को प्राप्त इस नगर को तहस नहस कर दिया । इन आतातायी राजाओं के सैनिक इस आदिनाथ मंदिर को भी तहस नहस करने के लिए आगे बड़े लेकिन वे मंदिर की सीमा में प्रवेश भी नही कर सके , मानो उन्हें मंदिर के रक्षक देव ने कीलित कर दिया हो । आतातायी राजाओं ने अपनी भाव परिवर्तित करके आदिनाथ बाबा के दर्शन का भाव प्रकट किया तथा मंदिर में प्रवेश कर आदिनाथ बाबा को माथा टेका तथा क्षमा याचना करके संकल्प लिया कि इस मंदिर का सरंक्षण करेंगे तथा बचे हुए जैन श्रावकों को उन राजाओं ने अभयदान भी दिया ।

आमेर राज्य के सीमा क्षेत्र के युद्ध मे विजयश्री राजकुमार सांगा के हाथ लगी । विजय के बाद राजकुमार सांगा आमेर की ओर चल पड़े । मार्ग में उन्हें सांगानेर की उजड़ी हुई बस्ती दिखाई पड़ी । यहां जैसे ही राजकुमार सांगा को भव्य शिखरों वाला जैन मंदिर दिखाई दिया , वह प्रसन्नता से भर गया । उसे लगा जैसे कि शिखरों पर लगी पताकाएं उसका अभिनंदन कर रही हों । उसने मंत्रियों से कहा कि मानो यह शिखरें मुझे बुला रही हों , मुझे वहां ले चलो । उसने देवाधिदेव आदिनाथ भगवान एवं पार्श्वनाथ भगवान के दर्शन किये । बाबा के दर्शन से उसे अलौकिक शांति प्राप्त हुई । तदनुसार राजकुमार सांगा ने आमेर की गद्दी पर बैठते ही सबसे पहले इस बस्ती को सुंदर ढंग से बसाया । सांगानेर को पूर्वत सुंदर वैभव पुनः प्राप्त होना इन्ही अतिशय कारी आदिनाथ बाबा की महिमा ही है।

Jain Mandir Sanganer
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